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      महिलाएं कैसे 20 घरेलू उपाय की मदद से प्रेगनेंसी में बवासीर का इलाज कर सकती है ?

      महिलाएं कैसे 20 घरेलू उपाय की मदद से प्रेगनेंसी में बवासीर का इलाज कर सकती है ?

      How can you extract your pregnancy with IVF GEM

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        गर्भावस्था की स्टेज में बवासीर का होना आम बात है और शायद इसलिए इसे गर्भावस्था का एक बड़ा साइड-इफ़ेक्ट भी माना जाता है। वहीं गुदा के आस-पास की नसों में सूजन भी बवासीर कहलाता है। लेकिन, अच्छी बात यह है कि अगर गर्भावस्था के समय पाइल्स का ग्रेड सामान्य है तो इसे कुछ घरेलू उपायों की मदद से ठीक किया जा सकता है। तो आइये जानते है की वो आखिर कौन-से घरेलु उपाय है जिसकी मदद से आप बवासीर की समस्या से निजात पा सकती है ;

        गर्भावस्था के दौरान बवासीर क्या है ?

        • गर्भावस्था के दौरान बवासीर एक गर्भवती की परेशानी को बढ़ाने का काम कर सकता है। बता दें कि पाइल्स ऐसी शारीरिक समस्या है, जिसमें गुदे में और मलाशय के निचले क्षेत्र की नसों में सूजन हो जाती है। इसके होने का सबसे आम कारण कब्ज को माना जाता है। 
        • वहीं, गर्भावस्था के दौरान इसके होने के पीछे कई अन्य कारण भी जिम्मेदार होते है। 

        प्रेगनेंसी के दौरान बवासीर की समस्या किन कारणों से होती है ?

        • हॉर्मोन में बदलाव के कारण। 
        • पेट के निचले हिस्से में दबाव पड़ने के कारण। 
        • शौचालय में अधिक समय तक बैठने के कारण। 
        • कब्ज की समस्या होने पर। 
        • सिरोसिस (क्रॉनिक लिवर डैमेज) के कारण। 
        • फाइबर युक्त खाद्य पदार्थों का कम सेवन करने के कारण।
        • पाइल्स की फैमली हिस्ट्री की वजह से भी यह हाे सकता है।

        बवासीर के दौरान गर्भवती महिलाओं में किस तरह के लक्षण नज़र आते है ? 

        • मलद्वार से रक्तस्राव का आना।
        • गुदा क्षेत्र में दर्द के साथ सूजन की समस्या का सामना करना।
        • गुदा क्षेत्र में जलन और खुजली की शिकायत का होना।
        • मलद्वारा के पास एक या एक से अधिक गांठ का बनना आदि।

        बवासीर के लक्षण गंभीर दिखने पर आपको पंजाब में बवासीर का इलाज करवा लेना चाहिए।

        गर्भावस्था में किस घरेलु उपाय की मदद से बवासीर का इलाज किया जा सकता है ?

        1. गर्भावस्था में बवासीर से बचने के लिए महिलाओं को सेब का सेवन करना चाहिए क्युकि ये शरीर में कोलेस्ट्रोल लेवल को कम करता है और इसमें मौजूद फाइबर कब्ज से राहत दिलाता है। रोज एक सेब खाकर गर्भावस्था के दौरान होने वाले बवासीर से बचा जा सकता है। लेकिन, इसका सेवन करते समय यह जरूर ध्यान दें कि इसे छिलका सहित खाएं।
        2. गर्भवती महिलाओं के लिए केला बहुत लाभदायक होता है। यह अद्भुत फल न सिर्फ पोटेशियम (potassium), फोलिक एसिड (folic acid) और विटामिन बी 6 (vitamin B-6) का एक संपन्न स्रोत है, बल्कि भ्रूण तंत्रिका तंत्र के निर्माण के लिए भी बेहद फायदेमंद है। पेक्टिन और फाइबर से भरपूर केला पाचन तंत्र को सुधारता है और आँतों को साफ़ करके कब्ज से राहत दिलाता है। गर्भावस्था में बवासीर के इलाज के लिए नियमित रूप से एक केला खाए।
        3. ब्रोकोली जो विटामिन और मिनरल्स से युक्त सब्जी है। यह एंटी-ऑक्सीडेंट और फाइबर से लबालब होती है। इसे नियमित रूप से सूप या सब्जी के रूप में खाया जाता है और गर्भावस्था के दौरान होने वाले पाइल्स से छुटकारा पाया जा सकता है। इससे कब्ज नष्ट होता है और बवासीर से लाभ मिलता है।
        4. नारियल तेल जोकि एंटीमाइक्रोबियल (antimicrobial) और एंटी-इंफ्लेमेटरी (anti-inflammatory) गुणों से संपन्न है। इस तेल को गर्भावस्था के दौरान बवासीर का इलाज करने का बहुत ही आसान उपाय माना जाता है। यह बवासीर के कारण होने वाले सूजन को कम करने में मदद करता है और गर्भवती महिला के लिए बिल्कुल भी नुकसानदायक नहीं है। प्रेग्नेंट महिला इसे नियमित रूप से दिन में तीन बार प्रभावी क्षेत्र पर लगा सकती है। 
        5. सिट्ज बाथ बवासीर का दर्द दूर करता है और सूजन कम करके बवासीर के मस्सों को सिकोड़ने का काम करता है। बाथिंग टब में गुनगुना पानी डाल लें और उसमें दो चम्मच नारियल या जैतून का तेल मिला लें। अब इस टब में गर्भवती महिला अपने गुदा को 15 से 20 मिनट तक डुबोकर रखें। इसके बाद टॉवल या हल्के कपड़े से आहिस्ता-आहिस्त गुदा क्षेत्र को सुखाएं। सुखाते समय इस बात का ध्यान रखें कि तेज से न रगड़े बल्कि, कपड़े को हल्का-हल्का स्पर्श करें। इससे गर्भवती महिला को बवासीर के दौरान होने वाली खुजली और दर्द से राहत मिलेगा। 
        6. प्रेग्नेंट महिला को बवासीर होने पर बर्फ के गोले का इस्तेमाल करना चाहिए। बर्फ की सेंक से दर्द, सूजन और जलन से राहत मिलती है। एक साफ़ सूती कपड़े में बर्फ के टुकड़े को डालकर बवासीर से प्रभावित हिस्से कि सिंकाई करे। गर्भावस्था के दौरान बवासीर से तुरंत राहत पाने के लिए और दर्द, सूजन को कम करने के लिए बर्फ की सिंकाई दिन में तीन से चार बार जरूर करें।
        7. शकरकंद यानी स्वीट पोटैटो अपने बेहतरीन गुणों की वजह से मशहूर है। इसमें फाइबर और फैट बहुत कम मात्रा में पाया जाता है इसलिए, यह गर्भावस्था के दौरान महिलाओं में बवासीर के लिए एक उत्तम खाद्य भी है। 
        8. एलोवेरा जेल अपने सुहाने गुण के कारण महिलाओं के बवासीर की जलन और सूजन कम करने के लिए जाने जाते है। प्रेगनेंसी के दौरान इनके उपयोग से महिला और पेट में पल रहे बच्चे को कोई भी परेशानी नहीं होती है। पाइल्स के इलाज के लिए एलोवेरा का इस्तेमाल कई तरह से किया जा सकता है। पर एलोवेरा का चयन किस तरह से करना है या इसका चयन करना चाहिए या नहीं इसके बारे में जानने के लिए आपको गायनेकोलॉजिस्ट डॉक्टर का चयन करना चाहिए। 
        9. डॉक्टर गर्भवती महिला को नाशपाती खाने की सलाह देते है क्योंकि, इसमें कई तरह के विटामिन्स और मिनरल्स पाए जाते है, जो भ्रूण विकास के लिए जरूरी होते है। गर्भावस्था के दौरान नाशपाती का सेवन करने से कब्ज नहीं होता है और बवासीर से बचा जा सकता है। प्रेगनेंसी के दौरान नाशपाती खाने से न सिर्फ बवासीर से राहत मिलती है बल्कि, इससे महिला के हर अंग का सूजन कम होता है। 
        10. गर्भावस्था में बवासीर के चलते होने वाली जलन और सूजन को दूर करने के लिए आलू का पैक बहुत ही फायदेमंद माना जाता है। बवासीर के लिए आलू का पैक बनाने के लिए आलू को छीलकर उसका पेस्ट बना लें और उसमें नींबू का रस निचोड़ लें। अब इस मिश्रण को अच्छी तरह से छान लें और निकले हुए रस में एक कॉटन के कपड़े को डुबो लें। इस कपड़े से बवासीर के मस्सों की सिंकाई करें। इससे दर्द दूर होगा और प्रेगनेंसी की बवासीर का इलाज भी हो सकेगा।
        11. काले जीरे को लें और इसमें पानी डाल कर इसका पेस्ट बनाए और प्रभावित क्षेत्र पर लगाए। 
        12. बवासीर में लहसुन का इस्तेमाल भी काफी मददगार साबित होता है।  
        13. जितना हो सकें आपको अपने आहार में फाइबर को शामिल करना चाहिए। 
        14. आहार में प्रोबायोटिक को शामिल करें। 
        15. तले-भुने पदार्थों का सेवन न करें। 
        16. व्यायाम करें। 
        17. भरपूर मात्रा में पानी पिएं। 
        18. स्वच्छता बनाए रखे। 
        19. मूली इस्तेमाल करें।
        20. तिल के तेल का उपयोग भी बवासीर के उपचार के लिए किया जा सकता है। इससे जुड़े एक शोध में पाया गया कि तिल का तेल अंदरूनी और बाहरी बवासीर के उपचार में फायदेमंद माना जाता है।

        गर्भावस्था में बवासीर का इलाज कैसे किया जा सकता है ?

        जब घरेलु उपाय की मदद से बवासीर पर काबू न पाया जा सकें तो इसके लिए आपको निम्न इलाज का चयन करना चाहिए ;

        टाॅपिकल ट्रीटमेंट : 

        गुदा क्षेत्र में सूजन और दर्द को कम करने के लिए एनाल्जेसिक और एंटी इंफ्लेमेटरी युक्त मलहम के उपयोग की सलाह डॉक्टर दे सकते है।

        स्टूल सॉफ्टनर : 

        मल को मुलायम बनाने के लिए स्टूल साॅफ्टनर लेने की सलाह दी जा सकती है, ताकि कब्ज की दिक्कत ना हो।

        ओरल फ्लेवोनोइड्स : 

        बवासीर के उपचार के लिए मौखिक दवा के रूप में फ्लेवोनोइड का उपयोग किया जा सकता है। एक शोध में बवासीर के उपचार के लिए माइक्रोनाइज्ड डायोस्मिन और हेसिपरिडिन को प्रेगनेंसी में सुरक्षित और प्रभावी बताया गया है।

        सर्जरी : 

        बवासीर की जटिल अवस्था में सर्जरी का फैसला भी लिया जा सकता है। और इसे अंतिम उपचार के तौर पर देखा जा सकता है।

        अगर बवासीर की समस्या गंभीर रूप धारण कर चुकी है तो इससे बचाव के लिए आपको सर्जरी का सहारा लेना पड़े तो इसके लिए आपको जेम हॉस्पिटल एन्ड आईवीएफ सेंटर का चयन करना चाहिए। 

        निष्कर्ष :

        बवासीर की समस्या काफी गंभीर मानी जाती है इसको झुठलाया नहीं जा सकता है, इसलिए जरूरी है की आपको इसके लक्षण अगर शुरुआती दौर में नज़र आए तो इससे बचाव के लिए आपको जल्द डॉक्टर का चयन करना चाहिए।

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